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कड़वा सच लोक कथा

कड़वा सच लोक कथा  ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को […]

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गरीबा कि दीपावली गरीब मजदूर के शोषण कि कहानी

गरीबा कि दीपावली गरीब मजदूर के शोषण कि कहानी यूं        कोरोनावायरस ने   सेठ साहूकारों कि दीवाली फीकी कर दी थी फिर भला   दिहाड़ी मजदूरों कि  क्या धनतेरस का दिन था कहते हैं इस दिन लक्ष्मी जी का धनाढ्य घर से गरीब घर में पदार्पण होता है या नहीं होता है यह तो

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गुलाब का फूल

गुलाब का फूल . तुम्हें बन ऊपवन जा खोजा पर पा नही सका तेरा जबाब ।तू तो वहां मिला शहरों मैं कस्बे से बहुत दूरकच्ची पंगडंडी के पार जहां न मोटर साइकिल पहुंचे न  ही बस कार न आलीशान भवन.न महापुरुषो कि भीड़ जहां न कवि न कलाकार.जहां न रोशनी.न वह फैशन जिसकी लपेट मे आ गया संसार ओ काले गुलाब वहा इनसान अपना अतीत भविष्य

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बेटा

बेटा  यूं तो रत्न लाल ने जीवन मैं सब कुछ हासिल कर लिया था दो बेटे थे बडा बेटा  चुन्नीलाल आईएएस अफसर था . वहीं छोटा बेटा मुन्ना लाल सेना मै कर्नल जैसे बढे पद पर आसीन था शादी के लिए बिरादरी से बहुत रिश्ते आ रहे थे दहेज कार नगद रूपये का  प्रलोभन दिया

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” मैं ठग हूँ ” काका की कविताएं

” मैं ठग हूँ ” काका की कविताएं अर्थ रात थी नींद में था सपनों के कि दुनिया में था न थी देह कि खबर न हि था  व्यापार हानि लाभ का भय न था परिवार का गुमान पुत्र पत्नी बहू बाबूजी मां का खयाल बस था ऐक ही काम आराम आराम ।सहसा  अंतरात्मा सपने मैं आई थी बोली तू ठग है

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डी एन ए कहानी

डी एन ए कहानी तो जनवरी महीने के आखिरी सप्ताह तक सर्दी के साथ कोहरा अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है पर पर्यावरण के लहज़े से कभी कम कभी ज्यादा रहता है हालांकि कोरोनावायरस के काल में सर्दी गर्मी कोई मायने नहीं रखती क्यों कि इस काल में हार्ट अटेक ब्लड प्रेशर निमोनिया कैंसर सुगर जैसी

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हवा के साथ

हवा के साथ जब कभी हवा के साथ सरसराहट के साथ मेरे बदन को दुलारती है जाने ऐसा क्यों लगता यह तेरा सिर्फ तेरा संदेश सुनाती है तेरी सांसों कि खुशबू हवा में आ आत्मा को नवगीत सुनाती है मेरे मायूस चेहरे को खुशी से भर दूर कहीं दूर चली जाती है शान्त सा एकान्त

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पति-पत्नी और वो किस्सा

पति-पत्नी और वो किस्सा  ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को

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दो गज कि दूरी

दो गज कि दूरी यूं  सेठ लछमी चंद को रूपयों पैसे कि कोई भी तंगी नहीं थी भगवान का दिया हुआ सब कुछ था दर्जनों  कारे  बंगले थे हजारों  करोड़ रुपए कि (रियल एस्टेट) कम्पनी के मालिक थे  अनेकों शहरों में व्यापार फैला था सेकंडों नोकर चाकर थे पावर इतना कि बढ़े बढ़े मंत्री चाय

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जन्मदिन

जन्मदिन  बंग्ले में नाती के जन्म दिवस पर भव्य आयोजन किया गया था शहर के जाने माने सम्मानित रहीश हाथों में गुलदस्ता भेंट लेकर सपरिवार सहित आ रहें थें बेटा धनीराम बहू लछमी बंगले के गेट पर सभी मेहमानों का मुस्कुराते हुए स्वागत कर रहे थे घर के नौकरों को पहले ही आदेश दिया गया

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