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ससुर जी का दूसराविवाह

 आजकाल नीता ससुर जी के व्योहार में अलग तरह का परिवर्तन देख रही थी जैसे कि जब वह किचन में खाना पकाने में व्यस्त रहतीं तब अनावश्यक ही वह किसी न किसी बहाने से आ जाते व जब वह बाथरूम में नहाने जाती तब उसे लगता था कि जेसै कोई दरवाजे कै ऊपर लगे रोशन […]

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रक्षाबंधन भाई बहन के बंधन की कहानी

सुबह  विमला पति के लिए नाश्ता के साथ लंचबॉक्स तैयार कर रहीं थीं साथ ही ख्यालों में खोई हुई थी पता नहीं कि भैया भाभी रक्षाबंधन पर बुलाते हैं या नहीं पहले तो अम्मा थी जो सभी तीज त्यौहार पर बुला लिया करतीं थीं पर उनके गुजर जाने के साथ ऐसा लगता है कि जैसे

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अपनी पहचान

 सूर्य दिशा कि पहचान क्या सूरज के उदय होने से हैं सूर्य नही निकलेगा न ही सुबह कि लालमा रहती तब क्या चांद का राज ही रह जाता क्या सूर्य दिशा का पता ही नहीं रहता प़शन है आपसे आपके अतीत से आपके वर्तमान से आपके सुनहरे भविष्य से  जिसे आप संजोए हुए है  सुखद

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घर वनाए जमीं खरीदी-बिक्री कि कारण यह था

अलमारी में हमारे जीवन यापन के लिए बहुत कुछ संपत्ति छोड़ गया हैं जो मेरी है मेरे जीते-जी किसीको भी नहीं मिलेंगी एसा कहकर बुड्ढी रोने लगी थीं  हाय हाय तुम तों स्वर्ग वासी हों गए हमें भी साथ में लेकर जाते देखो तुम्हारे बेटे तुम्हें जलाने से पहले तुम्हारी अलमारी का बटवारा करना चाहते

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तलाक

सावन माह में वर्षांत होना तो आम बात है परन्तु इस बार जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही थी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया शहर के हर उस हिस्से को जहां जल भराव ज्यादा था पत्रकार छाता लगाकर घुटने तक पानी कि तस्वीरें चीख चीख कर बयां कर रहे थे उनके अनुसार मानों धरती जल में

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झोली भर खुशियां

बेटी तेरी उम्र ही क्या है पच्चीस में ही तो चल रही है एक बच्चे कि ही तो मां है देख बेटी मेरी बात मान ले तेरी सारी उम्र अभी पड़ी है जीवन कि कठिन डगर बहुत दुःख दाइ हैं तू कह तब मैं रिश्ते कि बात करूं विनीता से उसकी सास ने कहा था

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पिघलती भावनाऐं समाजिक कहानी

पिघलती भावनाएँ: एक सामाजिक कहानी – आपकी वेबसाइट का ब्लॉग पिघलती भावनाएँ: एक सामाजिक कहानी प्रकाशित: अक्टूबर 27, 2023 | लेखक: आपकी वेबसाइट का नाम ठंड का मौसम था, लोग घरों के अंदर अलाव जलाकर ताप रहे थे। कुछ तो बिस्तर में ही कम्बल में लिपटे हुए थे, पर ऐसे ठंडे मौसम में बच्चे कहाँ

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अटूट विश्वास इंसान जानवर कि कहानी

अटूट विश्वास इंसान जानवर कि कहानी > अर्ध रात्रि का समय आसमान में तारे टिमटिमाते हुए अपनी आलोकित आभा से शीतलता बिखेर रहे थे ऐसे ही बेला में कोरोनावायरस के कठिन समय में प्रवासी मजदूरों के जत्थे भूख प्यास पुलिस प्रशासन से जूझते हुए अपनी मंजिल कि और कदम ताल मिलाकर चलते हुए जा रहे

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सरहद ग्रामीण संस्कृति किसानो कि कहानी

सरहद ग्रामीण संस्कृति किसानो कि कहानी     जून के पहले सप्ताह   उमस से भरी हुई गर्मी में  घर से बाहर निकलना दुश्वार नजर आता है शहरों में लोग ऐ सी कुलर कि ठंडी-ठंडी हवा में यह तपते मौसम  का लुत्फ उठाते हैं उसके विपरीत गांव में किसान ऐसे ही मौसम में अपने अपने खेतों

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मोटरसाइकिल

मोटरसाइकिल यो तो  कार्तिक महीना  किसान के लिए गेहूं कि फसल या फिर सरसों चना आदि के लिए समय के लिहाज से बहुत ही अनुकूल है पर अगर कुछ दिन इधर उधर हो गये तब किसान गया काम से  ऐसे ही महीने मे  अपने खेत पर पत्नी के साथ पिछली फसल के ठूठ खरपतवार इक्कठा

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