अलमारी में हमारे जीवन यापन के लिए बहुत कुछ संपत्ति छोड़ गया हैं जो मेरी है मेरे जीते-जी किसीको भी नहीं मिलेंगी एसा कहकर बुड्ढी रोने लगी थीं
हाय हाय तुम तों स्वर्ग वासी हों गए हमें भी साथ में लेकर जाते देखो तुम्हारे बेटे तुम्हें जलाने से पहले तुम्हारी अलमारी का बटवारा करना चाहते हैं हाय हाय बुड्ढी चीख मारकर रो रही थी खैर मां कि चीख पुकार सुनकर बेटों का दिल पसीज गया था बे भी रो रहै थै बहुओं भी विलाप कर रही थी पर उनके विलाप का यह कारण था कि बुड्ढी किसके साथ रहेंगी कारण यह था कि अलमारी कि चाबी किस को नसीब होंगी ।
मेघ ने कृपा कि थीं चिता कि अग्नि प्रज्वलित हो कर आसमां छू रहीं थीं देह के सभी तत्व वापिस जल अग्नि वायु इत्यादि में मिल रहें थे जैसे कि दो प्रेमी सच हीं है कि यह देह कि संरचना प्रकृति ने कि थी जो कि उसने उसमें प्राण , हाड़ मांस ख़ून से तैयार कि थी लम्बे समय तक देह ने संसार में अपना अभिनय किया था फिर वापस उसे उसी पृक़ती के पास जाना था !
चारों बेटे बहुओं ने बाप कि तेरहवीं धूमधाम से मनाई थी आस पास के दोस्त यार गांव समाज रिश्तेदार को भी बुलाया था ब्राह्मणों को भोजन कराया गया था वह दान दिया गया था फिर गंगा जी में अस्थियां विसर्जित कर दी गई थी मतलब पिताजी को स्वर्ग भेजने के लिए कोई भी कंजूसी नहीं कि थीं ।
चूंकि अम्मा को अलमारी कि चाबी मिल गई थी जिसे बे हमेशा अपनी कमर में बांध कर रखतीं थीं उस कमरे में जाती थी फिर अलमारी को खोलने को खट-पट करतीं थी उस समय कोई भी बहू बेटा दिखाई दे जाता था तब जल्दी ही बे कमरे से बाहर निकल कर दरवाजा पर ताला जड़ देती थी फिर सान के साथ कभी छूले पर बैठती तब कभी आराम कुर्सी पर बैठ कर आराम फरमाने लगती फिर कभी कभी टेलीविजन पर रामायण महाभारत जैसे सिरियल देखती रहती कभी कभी किसी संत महात्मा के प्रवचन आ भजन कीर्तन सुनतीं रहतीं थीं अब अम्मा का सारे परिवार के बीच में सम्मान था उन्हें भांति भांति के व्यंजन बहुओं के हाथ का खानें को मिलता था लड़के भी हाथ पैर कि मालिश कर रहे थे कुल मिलाकर सब प्रकार से खुशहाल थीं ।
फिर एक दिन सावन कि बारिश, कड़कती बिजली,के बीच अम्मा भी भगवान के पास चलीं गयी थी रोना धोना फिर चल रहा था बेटों के बीच अलमारी खोलने के लिए बहस हो रही थी पर फिर से बड़ बेटे ने समझाया था कि पहले अम्मा कि सारी व्यवस्था करें जैसे कि दिन तेरहवीं गंगा जी में अस्थियां का विसर्जन आदि ।
अम्मा के क़िया कर्म से निवृत्त होने के बाद अलमारी सभी भाइयों बहूएं की सहमति से खोली गई थी जिसमें संपत्ति के नाम पर पुराने अखबर किताबें रखीं हुई थी परिवार के सभी सदस्यों ने अपना-अपना माथा माता पिता कि चतुराई पर ठोक लिया था उन्हें भी जीवन के अंतिम समय में केसे सेवा कराना चाहिए मंत्र मिल गया था!!!!।।